Masturbation

हस्तमैथुन – अच्छा या बुरा..??

चेतन अवस्था में जानबूझकर स्वयं की इंद्रिय को खुद के हाथ से घर्षण करके मन, मस्तिष्क एवं इंद्रियों को उत्तेजित कर कामेच्छाकी पूर्ति करने को हस्तमैथुन कहा जाता है इसे हस्तक्रिया मास्टरबेशन और हॅंड प्रॅक्टीस आदि नामों से भी जाना जाता है | इसे हस्तक्रिया Masturbation और Hand Practice आदि नामों से भी जाना जाता है | इस अंग्रेज़ी शब्द की उत्पाती लैटिन शब्द मास्टरबेरी (अपने आपको अपवित्र करना) से हुई है | 

हस्तमैथुन के कई कारण होते है :-

१) १२ से १३ वर्ष की आयुमें जब जाननेंद्रियों का विकास होना प्रारंभ होता है तथा शुक्रधातु की पुष्टि होने लगती हैं, तब विपरीत लिंग की ओर आकर्षण स्वभावतः ही बढ़ जाता है | इस घर्षण की लालसा से आज अधिकांश युवा १२-१३ वर्ष की आयुमे ही बुरी संगत के कारण जैसे अश्लील किताबें पढकर, सिनेमा, टीव्ही, मोबाईल, लैपटोप पर कामुक दृश्यों को देखकर हस्तमैथुन द्वारा अपनी कामवासना को शांत करने की कोशिश करते है | ये कुसंगति में पड़कर अपने मित्र, रिश्तेदार, पड़ोसी या जाननेवालों से ही प्राय: यह आदत सीखते हैं और फिर इस आनंद को बार-बार हासिल करने के चक्कर में उसके आदी हो जाते है |

२) कभी-कभी जननेन्द्रिय के ऊपर की चमड़ी में खुजली होने लगती है, जब खुजाते हैं तो स्वाभाविक रूप से उत्तेजना आ जाती है और फलस्वरूप हस्तमैथुन का शिकार होते है | इसके अलावा घोड़े पर चढ़ने, सायकल दौड़ाने पर इंद्रिय में घर्षण से होनेवाली अनुभूती भी हस्तमैथुन को प्रेरित करती है | कुछ लडके लड़कियाँ पेट के बाल सोते या पढ़ते हैं तो उनकी जननेन्द्रियो पर दबाव पड़ता हैं और सहज ही हाथों से इंद्रियों को सहलाने या घर्षण करने से प्राप्त हुए आनंद से हस्तमैथुन की आदत डाल लेते हैं | प्राय: लोग हस्तमैथुन को एकांत में छुपकर ही करते हैं | अत्यधिक हस्तमैथुन के आदी लोग प्राय: निम्न लक्षण बताते हैं जैसे कि कठोरता में कमी होना, वीर्य पतला होना, वीर्य शीघ्र निकल जाना, शीघ्रपतन होना, भूख कम लगाना, अच्छा खाने पर भी सेहत न बनना, आत्मविश्वास कम होना, मानसिक तनाव रहना, आँखों के आगे अँधेरा एवं चक्कर आना, पेट साफ न होना, अपचन, खट्टेडकार, जोड़ो में दर्द रहना, स्मरणशक्ति कम होना, जल्दी भूल जाना, नींद कम आना, इंद्रीयके अण्डकोष में ढीलापन, अंडकोषों का लटक जाना, इत्यादि | परंतु ये सभी लक्षण हस्तमैथुन से ही होते है ऐसा कोई जरुरी नहीं होता |

आधुनिक विज्ञान हस्तमैथुन को ग़लत नही मानता परंतु आयुर्वेद के अनुसार हस्तमैथुन अप्राकृतिक एवं नुकसानकारक हैं | हस्तमैथुन एक स्वाभाविक या अस्वाभाविक क्रिया है | इसके पक्ष में निम्न तर्क एवं उनका खन्डन इस प्रकार किया जा सकता हैं :-

१) हमारे शरीर में कई तरह की ग्रंथियाँ होती हैं जिनसे होनेवाले स्त्रावो से शरीर की क्रियाएँ सुचारू रूप से चलती हैं | उसी तरह वीर्य भी एक प्रकार की ग्रंथियों का सामान्य स्त्राव हैं, इसके निकलने से किसी भी तरह से हानि नही होती | परंतु इसका खंडन इस प्रकार किया जा सकता हैं :-

* इसमें कोई आशंका नही कि वीर्य एक प्रकार का स्त्राव है परंतु बारबार अधिक मात्रा में निकलने से कमज़ोरी तो अवश्य आयेगी | उदाहरण के तौर पर स्तन से दूध अत्यधिक मात्रा में निकलने पर शरीर में कमज़ोरी आती हैं | इसलिए चिकित्सक दूध पिलानेवाली माताओं को अधिक पौष्टिक खुराक देने का निर्देश देते हैं | उसी प्रकार रक्तदान करने के लिए कहा जाता हैं परंतु आप हर रोज या सप्ताह में २ बार रक्त नहीं दे सकते यानी कि अत्यधिक मात्रा में नहीं दे सकते | इससे आपको हानि होती है | उसी प्रकार शरीर से मलमूत्र किसी कारण से अधिक मात्रा में निकलने पर कमज़ोरी का अनुभव होता है | उसी तरह अत्यधिक वीर्य निकलने से भी कमज़ोरी आती हैं | इसलिए यह कहना उचित नहीं कि वीर्य निकलने से हानि नहीं होती |

२) स्त्री से सहवास करने में भी उतनी ही मात्रा में वीर्यपतन होता है जितना कि हस्तमैथुन में | परंतु सहवास से कोई कमज़ोरी नहीं आती है तो हस्तमैथुन से आनेवाली कमज़ोरी का दावा ग़लत है | इसका खंडन इस प्रकार किया जा सकता हैं |

* स्त्री संभोग एक प्राकृतिक और स्वाभाविक क्रिया है | हस्तमैथुन के लिए अनैसर्गिक प्रयास किया जाता है | स्त्री सहवास में व्यक्ति बहुत समय तक रमना चाहता है, परंतु इसके विपरित हस्तमैथुन जैसे तैसे शीघ्र निपटने की कोशिश की जाती है | शुरू शुरू में जब शरीर स्वास्थ्यपूर्ण एवं दोषरहित रहता हैं तब वीर्यपात होने में अधिक समय लगता है, किंतु निरंतर अभ्यास एवं जल्दी निपटाने के चक्कर में एक ऐसी स्थिति आती है की आधे या एक मिनट में वीर्यपात होने लगता है | इस प्रकार धीरे-धीरे स्तंभन या वीर्य का स्खलन रोकने की शक्ति का ह्रास होता है एवं स्त्री संभोग में कभी-कभी उत्तेजना आती ही नहीं | फिर साहित्य पढ़कर चित्र देखकर, कृत्रिम स्पर्श द्वारा या मन में कामक्रिडाओ की कल्पना कर तनाव उत्पन्न करने का प्रयास किया जाता है | हस्तमैथुन करते वक्त इंद्रिय की नसों पर हाथ तथा उंगलियाँ एवं अंगुलियो की हड्डियों का अधिक दबाव पड़ने से उसकी रक्तवाहिनी नसें और नाड़ी जाल पर विपरीत परिणाम होता है |हस्तमैथुन जब चाहे एकांत में स्नानगृह, पाखाना या पढ़ाई के कमरे में किया जाता है | परिणाम स्वरूप हस्तमैथुन अगर स्नानगार या पाखाने में किया जाता है तो वीर्यपात के तुरंत बाद लिंग को पानी से धोकर साफ किया जाता है जिससे तनावशक्ति को नुकसान पहुँचता है |

३) कई लोगों का तो ऐसा मानना है कि हस्तमैथुन करनेवाले स्वयं की संतुष्टि के लिए इसका प्रयोग करते हैं और अन्य व्यक्तियों पर इसका विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता | इसका खंडन इस प्रकार किया जा सकता है |

* स्वयं को हानि पहुँचाना भी अनुचित ही है | जैसे आत्महत्या करनेवाला स्वयं प्रेरणा से कार्य के लिए प्रवृत्त होता है | वैसे ही नशा करनेवाली व्यक्ति भी यह कहेगा कि मैं खुद को तकलीफ़ दे रहा हूँ | परंतु यह उचित नहीं क्योंकि इससे अन्य व्यक्ति प्रभावित होते है | और समस्त समाज का हिट-अहित उससे संबंधित होता है |

४) कुछ व्यक्ति कहते हैं कि अल्प मात्रा में किया गया हस्तमैथुन हानिकारक नहीं परंतु अत्यधिक हस्तमैथुन करने से दुष्परिणाम होते हैं |

यह कहना ग़लत है कि थोड़ा हस्तमैथुन हानिप्रद नहीं होता है | जितनी मात्रा में हस्तमैथुन किया जाता है उतनी मात्रा में नुकसान तो अवश्य होता ही है | और यह भी देखा जाता है कि थोड़ा हस्तमैथुन प्राय: संभव नहीं होता | धीरे-धीरे शराब आदि नशों की तरह इसकी लत पड जाती है, और मनुष्य स्वयंपर नियंत्रण नहीं रख पाता | इसलिए बार-बार हस्तमैथुन करता है जिससे अत्यधिक वीर्यनाश होता है |

५) सामान्यत: सभी हस्तमैथुन करते है परंतु सभी को इससे हानि नहीं होती | इसका खंडन इस तरह किया जाता है :-

* सभी हस्तमैथुन करनेवालों को हानि नहीं होती इसलिए इसमें कोई ग़लत बात नहीं ऐसा कहा जाए तो फिर सिगरेट पीने से कैन्सर होता है या शराब पीने से यकृत खराब होता है यह अच्छी तरह मालूम होने पर भी इसके सेवन को हानिप्रद नहीं मानना चाहिए | क्योंकि सभी सिगरेट पीने वालों को कैंसर एवं सभी शराब पीनेवालों का लीवर खराब नहीं होता |

६) कुछ तो ऐसा तर्क करते हैं की हस्तमैथुन या किसी अन्य तरीके से वीर्य ना निकाला जाए तो स्वप्नदोष द्वारा निकलने की संभावना होती है | तो क्यों न हस्तमैथुन काही आनंद लिया जाए? इसका खंडन इस प्रकार किया जा सकता है :-

हस्तमैथुन दिनमें १-२ बार महीने में ४०-५० बार किया जा सकता है परंतु यदि हस्तमैथुन छोड दे तो स्वप्नदोष ४०-५० बार नहीं होता | ज़्यादा से ज़्यादा ६-७ बार होगा | इसलिए यह कहना ग़लत है कि जीतने बार हस्तमैथुन नहीं करेंगे तो उतने बार स्वप्नदोष होगा |

इसके इलावा हस्तमैथुन से होनेवाली एक और परेशानी यह देखने को मिलती है कि जब भी हस्तमैथुन किया जाता है तो मनुष्य प्राय: अजीब कल्पनाएँ करता हैं | विभिन्न मॉडल एवं फिल्म की हेरोइनो के बारे में सोचता है, बहुत ही सुन्दर साचे में ढले शरीर के बारे में सोचता है | परंतु शादी के बाद जब उसे उस प्रकार का शरीर नहीं मिलेगा तो उसे उतनी उत्तेजना नहीं आती, उतना आनंद नही मिलता जितना कि हस्तमैथुन एवं उसकी कल्पनाओं से मिलता है | तो इस प्रकार पूरी मानसिक उत्तेजना न आने से स्त्री संबंध भी नहीं बन पाता | फ़लस्वरुप पति पत्नी में मनमुटाव रहता है | यही कारण है की पुरुष शादी के बाद भी हस्तमैथुन नही छोड़ पाते |

इतने तर्को एवं खंडनों के बाद हस्तमैथुन करना अच्छा है या बुरा इसका निर्णय पाठक स्वयं करें |